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आत्म प्राण उद्धार ही, ऐसा धर्म नहीं जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज

”आत्म प्राण उद्धार ही, ऐसा धर्म नहीं और। कोटि अश्वमेघ यज्ञ, सकल समाना भौर।।“ …

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